
इस वर्ष भी पारंपरिक उत्तराखंडी त्योहार ‘हरेला’ को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ मनाया। इस पर्यावरणीय पर्व के अवसर पर स्कूल के सभी छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने मिलकर वृक्षारोपण कर एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
विद्यालय परिसर के भीतर ही नहीं, बल्कि बाहर भी हर बच्चे ने एक-एक पौधा रोपित किया, जिससे न केवल विद्यालय हरा-भरा बना, बल्कि समुदाय को भी हरियाली और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश मिला।
“हरेला” पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि हर छात्र के जीवन का हिस्सा बन चुका है।
विद्यालय के प्राचार्य मनोज शर्मा के नेतृत्व में इस अनूठी पहल को वर्षों से निरंतरता दी जा रही है। उनका मानना है कि “हर विद्यार्थी जब विद्यालय में प्रवेश करता है, तभी से उसे एक पौधे की जिम्मेदारी दी जाती है, और वह पौधा उसी विद्यार्थी की स्कूल यात्रा का परिवारिक हिस्सा बन जाता है।”
इस प्रकार हर विद्यार्थी अपने पौधे को एक पारिवारिक सदस्य की तरह पालता है और देखभाल करता है, जब तक वह स्कूल से अंतिम दिन तक पढ़ाई पूरी नहीं कर लेता।
ग्रीन कैंपस के प्रेरणास्रोत
चंद्रबदनी पब्लिक स्कूल को आज एक ग्रीन कैंपस मॉडल के रूप में जाना जा रहा है, जहां हर कोना हरियाली से आच्छादित है। विद्यालय में वृक्षों की छाया में कक्षाएं लगती हैं, औषधीय पौधों की जानकारी दी जाती है, और जल संरक्षण की तकनीकों को अपनाया गया है।
हर वर्ष ‘हरेला पर्व’ पर वृक्षारोपण का आयोजन न केवल प्रकृति से प्रेम का प्रतीक है, बल्कि यह भावी पीढ़ी को जलवायु संकट, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति संवेदनशील बनाता है।
समुदाय को जोड़ता अभियान
विद्यालय की यह पहल केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आसपास के गांव और समुदाय भी इस अभियान से जुड़ते जा रहे हैं। हरेला पर्व के बहाने पूरा क्षेत्र हरियाली के प्रति एकजुट होकर कार्य कर रहा है।
अंत में…
चंद्रबदनी पब्लिक स्कूल का यह प्रयास शिक्षा और प्रकृति के सामंजस्य का आदर्श उदाहरण है। यह पर्व अब केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन गया है – “प्रकृति से प्रेम और संरक्षण का आंदोलन।”
हरी-भरी धरती, खुशहाल भविष्य — यही है चंद्रबदनी पब्लिक स्कूल की प्रेरणा। 🌱🌳